सियासतदान

 

चाँद और तारों के किस्से सुनाते हो
कुछ भी हो दिल अच्छा बहलाते हो|

siasatdaan

कहाँ से लाए ये अदा और ये एय्यारी
अंधों को भी सूरज के ख्वाब दिखाते हो|

काबले रश्क है ये हुनर कि हर मर्तबा
महज बात कर के बात बना जाते हो|

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